पर्वत सा ऊँचा प्रभु – Parvat Sa uncha Lyrics
पर्वत सा ऊंचा, सागर सा गहरा, प्रभु तेरा है प्यार
झरनों सा मीठा, फूलों सा कोमल, प्रभु तेरा जीवन
१. जीवन की राहों पर, भटकता फिरता रहा
तू मुझको ढूंढता रहा, मैं दिशाहीन होता रहा
२. पापों के जालों में, फसता धसता रहा
तेरा ह्रदय तड़पता रहा, मैं बेदर्द होता रहा
३. अंधेरी रातों में, बिजली कड़कती जैसे
तू मेरे जीवन में आया, मुझको जीना सिखाया
तू मेरे जीवन में आया, पापों से मुझको छुड़ाया

